सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों पर बातचीत करने और इस मसले को सुलझाने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इनमें अशोक गुलाटी और डॉ. प्रमोद के जोशी एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट हैं, जबकि भूपिंदर सिंह मान और अनिल घनवत किसान नेता हैं। चारों के पास इस सेक्टर का अच्छा-खासा अनुभव है। चारों सदस्यों के पुराने आर्टिकल और इंटरव्यू बताते हैं कि वे कृषि कानूनों के पक्ष में रहे हैं।
1. अशोक गुलाटी: MSP बढ़ाने में अहम भूमिका रही
अशोक गुलाटी एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट हैं। अभी वे इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन (ICRIER) में प्रोफेसर हैं। वे नीति आयोग के तहत प्रधानमंत्री की ओर से बनाई एग्रीकल्चर टास्क फोर्स के मेंबर और कृषि बाजार सुधार पर बने एक्सपर्ट पैनल के अध्यक्ष हैं। वे कृषि कानून को किसानों के लिए फायदेमंद बताते रहे हैं। पिछले साल सितंबर में एक अंग्रेजी अखबार में छपे अपने लेख में उन्होंने लिखा था कि ये कानून किसानों को अधिक विकल्प और आजादी देंगे। उन्होंने कई फसलों का मिनिमम सपोर्ट प्राइज (MSP) बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
2. डॉ. प्रमोद के जोशी: कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को फायदेमंद बता चुके
डॉ. प्रमोद जोशी भी एग्रीकल्चर इकोनॉमिस्ट हैं। अभी वे साउथ एशिया इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं। उन्हें एग्रीकल्चर सेक्टर में काम करने के लिए कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। उन्होंने 2017 में एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को किसानों के लिए फायदेमंद बताया था। तब कृषि कानून बनाए जा रहे थे। जोशी ने लिखा था कि इन कानूनों से फसलों के मूल्यों में उतार-चढ़ाव होने पर किसानों को नुकसान नहीं होगा और उनका जोखिम कम होगा।
3. भूपिंदर सिंह मान: इनकी समिति कृषि कानूनों का समर्थन कर चुकी
15 सितंबर 1939 को गुजरांवाला (अब पाकिस्तान में) में पैदा हुए सरदार भूपिंदर सिंह मान किसानों के लिए हमेशा काम करते रहे हैं। इस वजह से राष्ट्रपति ने 1990 में उन्हें राज्यसभा में नामांकित किया था। वे अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति के चेयरमैन भी हैं। उनकी समिति ने 14 दिसंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा था, ‘आज भारत की कृषि व्यवस्था को मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जो तीन कानून पारित किए गए हैं हम उन कानूनों के पक्ष में सरकार का समर्थन करने के लिए आगे आए हैं।’
4. अनिल घनवत: इन्होंने कहा था इन कानूनों से गांवों में निवेश बढ़ेगा
अनिल घनवत महाराष्ट्र में किसानों के बड़े संगठन शेतकारी संगठन के अध्यक्ष हैं। यह संगठन बड़े किसान नेता रहे शरद जोशी ने 1979 में बनाया था। अनिल घनवत का कहना है कि इन कानूनों के आने से गांवों में कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस बनाने में निवेश बढ़ेगा। घनवत ने ये भी कहा था कि अगर दो राज्यों के दबाव में आकर ये कानून वापस ले लिए जाते हैं तो इससे किसानों के लिए खुले बाजार का रास्ता बंद हो जाएगा।






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