शहर में एसएमएस, कांवटिया समेत विभिन्न अस्पतालों में गुरुवार को पतंगबाजी के दौरान करीब 100 घायल अस्पताल पहुंचे। प्रदेश के सबसे बड़े एसएमएस अस्पताल में पतंगबाजी के दौरान 34 घायल पहुंचे। एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश शर्मा व ट्रॉमा सेन्टर के उपाधीक्षक डॉ. जगदीश मोदी ने बताया कि 34 में से 32 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी। घायलों में 15 बच्चे भी शामिल थे। सिर में चोट के कारण झुंझुनूं के मोहन और मांझे से कटने वाले अब्दुल हमीद नगर पांच बत्ती के रहने वाले साहिल गंभीर हालत में थे।
दोनों काे पॉलीट्राॅमा वार्ड में भर्ती किया गया है। दोनाें की हालत फिलहाल स्थिर हैं। शास्त्री नगर स्थित कांवटिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लीनेश्वर हर्षवर्धन के अनुसार 50 घायल पहुंचे, जिन्हे प्राथमिक उपचार के बाद सभी को डिस्चार्ज कर दिया गया। एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेन्टर व कांवटिया में सीनियर डॉक्टरों की देखरेख में विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि घायलों को तत्काल उपचार किया जा सके। मकर संक्रांति पर्व पर एसएमएस व कांवटिया दोनों ही अस्पतालों में पिछले साल की तुलना में आधे ही घायल आए।
चायनीज मांझे ने उड़ाई बिजली, 20 फीडराें की 450 शिकायतें
चाइनीज मांझे से 20 फीडराें की 450 शिकायतें गुरुवार को मिलीं। वैसे राेजाना 225 शिकायतें आती हैं। सहकार मार्ग व विधानसभा क्षेत्र में फाॅल्ट की वजह से शाम काे 30 मिनट तक बिजली सप्लाई बंद रही। जवाहर नगर 132 जीएसएस पर चाइनीज मांझे से दाे बार फाॅल्ट आया। इससे ब्रेकर डेमेज हाे गया।
डराने वाली डोर; चाइनीज मांझे के गहरे घाव, नाक-पलकें तक कटीं
उल्लास के सबसे बड़े पर्व मकर संक्रांति की खुशियों में खलल पड़ गया। सुरक्षित पतंगबाजी की अपील के बावजूद शहर में चाइनीज मांझा बिका। खमियाजा पक्षियों और टू-व्हीलर चालकों को भुगतना पड़ा। जयपुरिया अस्ताल में 20 से ज्यादा केस आए। एक बाइक चालक चाइनीज मांझे में इस कदर उलझा कि उनकी दोनों पलकें और नाक तक कट गई। 50 टांके लगे हैं।
पुण्य आपका, पाप किसका? गो-सेवा के बाद पतंगबाजी से परिंदे घायल
पुण्य के सबसे बड़े त्योहार मकर संक्रांति पर गुरुवार को लोगों ने पुण्यकाल में खूब दान किया। गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाने के अलावा गरीबों को कंबल, कपड़े और अन्य सामान भी बांटे गए। गोसेवा के साथ पतंगकाल में सैकड़ों पक्षी मांझे से कटकर घायल हुए।
करीब 12 एनजीओ ने 500 से ज्यादा घायल परिदों का इलाज किया। मरने वाले पक्षियों की संख्या सैकड़ों है। सवाल यह कि पुण्य-पर्व पर यह पाप किसका होगा। शाम को पतंगबाजी के प्रतिबंधित समय 5 से 7 बजे भी पतंगबाजी जारी रही। इसी दौरान सबसे ज्यादा परिंदे घायल हुए।

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