जिस बेटे काे बुढ़ापे में पिता का सहारा बनना था उसे रविवार काे बाप को कंधा देकर अंतिम विदाई देनी पड़ी। पचेरी खुर्द निवासी फाैजी मनीष मेघवाल का झांसी में शुक्रवार काे निधन हाे गया था। वे क्वारेंटाइन थे। उनकी पार्थिव देह के साथ आए सेना के जवानाें ने अभी उनके निधन का कारण नहीं बताया है। मेडिकल रिपाेर्ट आने के बाद कुछ कहने की बात कही है। सैनिक मनीष मेघवाल का पार्थिव देह रविवार सुबह उनके गांव पचेरी खुर्द पहुंचा।
घर में काेहराम मच गया। जवान बेटे की पार्थिव देह देख कर गांव के युवा और बूढ़े मनीष के घर पहुंच गए। शव देख कर मां सजना व बहनों का बुरा हाल हो गया। पिता मदनलाल की हिम्मत जवाब देने लगी। वे पैरों पर खड़े नहीं रह सके और गश खाकर जमीन पर गिर गए। बड़ी मुश्किल से लाेगाें ने उन्हें संभाला।
माहाैल इस कदर गमगीन था कि हर किसी की आंख से आंसू बह रहे थे। पार्थिव देह के साथ आए नायब सूबेदार मनोज कुमार ने मनीष के पिता मदनलाल को तिरंगा व सहयाेग राशि भेंट की। नायब सूबेदार मनोज कुमार व सुनील यादव ने मनीष की मौत के कारणों का खुलासा नहीं करते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार करने को कहा। जवान मनीष मेघवाल के अंतिम संस्कार में पचेरी व आसपास के गांव से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जवानों ने पुष्पचक्र अर्पित किए।

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