चाय बागानों की खुशबू से महकने वाला असम इस साल भी पानी में डूब रहा है। यहां के 33 में से 30 जिले बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। गृह मंत्रालय पर 15 जुलाई तक का डेटा मौजूद है। इसके मुताबिक, 22 मई से लेकर 15 जुलाई के बीच यहां के 4 हजार 766 गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
48.07 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 1.28 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर रिलीफ कैम्प में रहने को मजबूर हैं। जबकि, 92 लोगों की जान भी जा चुकी है।
असम को हर साल बाढ़ से जूझना ही पड़ता है। आंकड़ों की मानें तो पहले ऐसा होता था कि बाढ़ आती भी थी, तो 4-5 साल में एकाध बार। लेकिन, पिछले कुछ सालों से बाढ़ हर साल आने लगी है।
असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है? इसे समझने के लिए पहले यहां की जियोग्राफी समझना जरूरी है।
ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया बढ़ रहा
असम में ब्रह्मपुत्र और बराक, दो प्रमुख नदियां हैं। इन दो के अलावा इनकी 48 सहायक नदियां और कई छोटी-छोटी नदियां हैं। इस वजह से यहां बाढ़ का खतरा ज्यादा है।
अकेली ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया भी लगातार बढ़ रहा है। असम सरकार ने 1912 से 1928 के बीच सर्वे किया था, तब ब्रह्मपुत्र नदी राज्य के 3 हजार 870 वर्ग किमी के एरिया को कवर कर रही थी। आखिरी बार 2006 में जब सर्वे हुआ, तो ब्रह्मपुत्र नदी का कवर एरिया बढ़कर 6 हजार 80 वर्ग किमी हो गया।
इसके अलावा नदी की औसतन चौड़ाई 5.46 किमी है। लेकिन, कुछ-कुछ जगहों पर इसकी चौड़ाई 15 किमी या उससे भी ज्यादा है।
असम में ब्रह्मपुत्र और बराक, दो प्रमुख नदियां हैं। इन दो के अलावा इनकी 48 सहायक नदियां और कई छोटी-छोटी नदियां हैं। इस वजह से यहां बाढ़ का खतरा ज्यादा है।

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