राजस्थान के पूर्व राज्यपाल अंशुमान सिंह का आज निधन हो गया। 86 के सिंह का आज उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद स्थित अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन पर कई नेताओं और मंत्रियों ने शोक जताया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके बड़े पुत्र अरूण प्रताप सिंह से फोन पर बात कर परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। राज्य सरकार ने उनके निधन पर एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। आज एक दिन के लिए सभी सरकारी दफ्तरों में छुट्‌टी रखी गई है। विधानसभा में सभी विधायकों ने दो मिनट का मौन रखकर अंशुमान सिंह को श्रद्धाजंलि दी गई, शोकाभिव्यक्ति के बाद 2:37 पर आधे घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित की गई।

सरकार के राजकीय शोक घोषित करने के साथ ही आज तमाम जगहों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया। वहीं मुख्यमंत्री सहित सरकार के सभी राजकीय कार्यक्रम (महिला दिवस पर) उन्हे भी रद्द कर दिया। गहलोत ने सोशल मीडिया पर भी संवदेना व्यक्त करते हुए लिखा राजस्थान और गुजरात के राज्यपाल के रूप में कार्य करने वाले न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह के निधन पर मेरी हार्दिक संवेदना। न्यायपालिका और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। भगवान इस नुकसान को सहन करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों को शक्ति दे।

वकील, न्यायाधीश और फिर बने राज्यपाल
पूर्व न्यायमूर्ति अंशुमान सिंह ने 16 जनवरी, 1999 को राजस्थान के राज्यपाल का पदभार संभाला था, जो 13 मई 2003 तक इस पद पर रहे। इससे पहले वे गुजरात के राज्यपाल भी रहे थे। उनका जन्म 7 जुलाई, 1935 को इलाहाबाद में हुआ। वर्ष 1957 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से विधि स्नातक की उपाधि प्राप्त की और कानून के क्षेत्र में गहरी रूचि के कारण 22 वर्ष की आयु में ही जिला न्यायालय, इलाहाबाद में वकालत शुरू की।

वे वर्ष 1976 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त हुए थे। साल 1984 में वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त हुए। वे 1994 में वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में राजस्थान उच्च न्यायालय में स्थानान्तरित किए गए थे। वर्ष 1994 से 1997 तक वे चार बार कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में भी पद भार ग्रहण किया।

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