1 नाज़ुक चुहिया



एक बार की बात है, एक नाजुक चूजा जंगल में सैर के लिए निकला। वह देवदार के पेड़ के नीचे से जा रहा था तभी अचानक एक फल उसके सिर पर आ गिरा।

नाजुक चूजे ने समझा कि हो न हो आसमान गिर रहा है। भयभीत होकर वह दौड़ने लगा। उसने जंगल के राजा शेर को यह बताने का निर्णय किया और तेजी से दौड़ने लगा। उसे बेतहाशा भागते देखकर मुर्गी ने पूछा, “अरे! ओ नाजुक चूजे, कहाँ दौड़े जा रहे हो?”

हाँफता-हाँफता नाजुक चूजा बोला, “आह! आसमान गिर रहा है, भागो… मैं शेर भाई को सूचित करने जा रहा हूँ।” मुर्गी भी नाजुक चूजे के साथ हो ली।

मार्ग में उनकी मुलाकात बत्तख से हुई। सारी बातें जानकर वह भी इनके साथ दौड़ने लगी। चलते-चलते उन्हें लोमड़ी मिली। उसने पूछा, “अरे भाई, तुम सब कहाँ जा रहे हो?” उन तीनों ने कहा, “हम लोग शेर को बताने जा रहे हैं कि आसमान गिर रहा है।”

लोमड़ी उन तीनों को शेर के पास ले गई। शेर सभी के साथ उस पेड़ के नीचे आया तभी फिर से देवदार का एक फल नाजुक चूजे पर गिरा और वह घबराकर चिल्लाया, “आह! वह देखो, आसमान गिर रहा है।” यह सुनकर सभी एक साथ हँसने लगे।

2. चमगादड़, पक्षी और पशु



एक बार पशुओं और पक्षियों के बीच में किसी बात को लेकर अनबन हो गई। युद्ध की ठन गई। दोनों ओर की सेना इकट्ठी हो गईं।

चमगादड़ बेचारा परेशान… वह समझ ही नहीं पा रहा था कि किसकी ओर जाए। उसे सोच में पड़ा देखकर पक्षियों ने आमंत्रित करते हुए कहा, “हमारे साथ आ जाओ” चमगादड़ ने उत्तर दिया, “अरे भाई, मैं तो पशु हूँ।”

पशुओं ने उसे अकेला देखा तो अपनी ओर आने के लिए कहा। चमगादड़ ने कहा, “मैं तो पक्षी हूँ।” सौभाग्य से दोनों पक्षों में अनबन समाप्त हो गई और युद्ध नहीं हुआ। दोनों पक्षों में दोस्ती हो गई।

चमगादड़ अब पक्षियों के दल के पास गया पर उन्होंने उसे अपने दल में लेने से मना कर दिया। हारकर वह पशुओं के पास पहुँचा तो उन्होंने भी नहीं स्वीकारा।

उसने समझ लिया कि आवश्यकता पड़ने पर साथ नहीं देने से कोई भी मित्र नहीं रहता है। उसके बाद से ही चमगादड़ अकेले रहने पर मजबूर हो गया।

Post a Comment

Previous Post Next Post