वॉट्सऐप, फेसबुक या अन्य कोई भी प्लेटफॉर्म भारत में बिजनेस करने के लिए स्वत्रंत है, लेकिन उन्हें मर्यादा में रहकर ऐसा करना होगा। उन्हें प्राइवेसी का पालन करना पड़ेगा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ये कहना है कि भारत के संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद का। प्रसाद मंगलवार को इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के 15वें सालाना सम्मेलन में बोल रहे थे। इवेंट पहली बार ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

जिस काम के लिए डेटा इकट्‌ठा किया गया, उसी में इस्तेमाल हो
प्रसाद ने बताया कि डेटा प्राइवेसी बिल पर अभी विचार चल रहा है। जल्दी ही इसे मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। प्रसाद ने कहा कि मैं डेटा को डिजिटल संप्रभुता से जोड़ कर देखता हूं, क्योंकि डिजिटल संप्रभुता पर भारत की इकोनॉमी भी निर्भर करती है। ऐसे में डेटा सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। जिस काम के लिए डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, उसी काम में उसका इस्तेमाल हो। डेटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी होगी जो उसे कलेक्ट कर रहा है।

डिजिटाइजेशन से 5 साल में 1.7 लाख करोड़ की बचत
आईटी मंत्री ने कहा कि पिछले साल महामारी के बावजूद इकोनॉमी चलती रही। इसमें डिजिटल इंडिया का विशेष योगदान रहा। डिजिटल इंडिया की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साढ़े पांच साल में 13 लाख करोड़ रुपए सीधे आम आदमी के खाते में पहुंचाए गए। तकनीक की मदद से लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई।

पीएलआई स्कीम से देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने की उम्मीद
प्रसाद ने कहा कि छह साल पहले भारत में सिर्फ 2 मोबाइल मैनुफैक्चरर थे जबकि आज इनकी संख्या 268 हो चुकी है। चीन के बाद हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल निर्माता बन गए हैं। नंबर वन बनने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। हमने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (PLI) की घोषणा की है। इसका सीधा मतलब यह है कि आप मैन्युफैक्चरिंग कीजिए, एक्सपोर्ट कीजिए, हम आपको इंसेटिव देंगे।
उन्होंने कहा कि हमने भारतीय कंपनियों की क्षमता जांचने के लिए इस स्कीम को कोविड पीरियड में लॉन्च किया था। स्कीम से जुड़ी कंपनियां अगले पांच साल में 10 लाख करोड़ के मोबाइल और इक्विपेंट तैयार करेंगी। इनमें से 7 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट होगा।


Post a Comment

Previous Post Next Post