रोजी रोटी की तलाश में गरीब मजदूर का परिवार जिस ईंट भट्टे पर महज दो दिन पहले ही मजदूरी करने आया वही भट्टा उसकी जिंदगी भर की खुशियों की चिता बन गया। मजदूर श्रवण और उसकी पत्नी पूजा सूरतगढ़ मंडी में काम करते थे। वहां से काम छूट गया तो ये लोग अपने दो बच्चों के साथ 17 जनवरी को मंड्रेला के पास नंदरामपुरा में एक ईंट भट्टे पर आ गए। इनमें एक बच्चा साढ़े पांच साल का जबकि दूसरा साढ़े चार साल का कार्तिक उर्फ काली था। यहां आने के दो दिन बाद 19 जनवरी को छोटा बच्चा काली लापता हो गया था।
शनिवार दोपहर भट्टे पर आग के अंदर पकाने के लिए रखी गई ईंटों के बीच उसकी अस्थियां मिली। सामने आया है कि यह मासूम अपने पिता को खोजता हुआ तपती ईंटों के बीच गिर गया था और किसी ने उसे नहीं देखा। बच्चे की तलाश के लिए एसपी मनीष त्रिपाठी ने पहले ही दिन चिड़ावा डीएसपी सुरेश शर्मा के नेतृत्व में चार थानों के प्रभारियों समेत 150 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई थी।
दुखद अंत : पांच दिन पहले भट्टे में फंसा, पुलिस ने तलाशा तो अस्थियां ही मिली
भट्टे पर ईंटों को पकाने के लिए थप्पा में रखा जाता है। इसमें नीचे आग होती है और ईंटों को जमा दिया जाता है। ऊपर बजरी या मिट्टी डाल दी जाती है। इसमें ईंटे कुछ दिन तक पकती हैं। बाहर से देखने पर पता नहीं चलता कि इसमें अंदर आग है। कार्तिक पहली बार ईंट भट्टे पर आया था। अनजाने में वह ईंटों के ढेर पर चढ़ गया और फिर गड्ढ़े में फंस कर अंदर चला गया। जहां से उसकी अस्थियां मिली।
अस्थियां मिलने की जगह के पास ही था पिता
पुलिस टीम पिछले पांच दिन से मासूम की तलाश भट्टे से 25 किमी के दायरे में कर रही थी, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर जांच वापस भट्टे पर ही फोकस की। पूछताछ में कुछ मजदूरों ने बताया कि पांच दिन पहले भट्टे में कुछ गिरने की आवाज सुनी थी, लेकिन समझा कि कोई जानवर गिरा होगा। इसलिए अनदेखा कर दिया। पुलिस ने उसी जगह से ईंटें हटवाई तो वहां से बच्चेे की अस्थियां मिली। जिन्हें देख काली का पिता श्रवण रोने लगा। बताया जा रहा है कि जिस दिन बच्चा लापता हुआ उस दिन उसका पिता इसी जगह की दूसरी साइड में काम कर रहा था।
17 को आए, 19 को लापता, 23 को अस्थियां मिली
Q अल्कपनीय दुखद अनहोनी कहां हुई? A मंड्रेला के पास नंदरामपुरा गांव के ईंट भट्टे पर हुई ये अनहोनी। Q नंदरामपुरा में कब हुई अनहोनी? A मासूम बच्चा अपने माता-पिता के साथ 17 जनवरी को ही यहां आया था। 19 जनवरी को वह लापता हो गया था। Q कितने दिन चला तलाशी अभियान? A पुलिस के 150 से अधिक जवान पांच दिन से नंदरामपुरा के 25 किमी एरिया में तलाशी में जुटे हुए थे। Q कैसे पता चला कि भट्टे में फंसा? A मजदूरों ने बताया कि उन्होंने 5 दिन पहले रोने की आवाज सुनी थी। तब ईंटें उखाड़ी।
हमने पूरे प्रयास किए
मासूम को तलाशने के लिए हमने पूरे प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। जो अस्थियां मिली हैं। उन्हें अभी जयपुर भेजा गया है। जहां उनकी डीएनए जांच करवाई जाएगी।
- मनीष त्रिपाठी, एसपी


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